पंचागप्रणाम या नमाज

मुस्लिम लोग इस्लाम के जन्म के पहले बौद्ध हुआ करते थे यही कारण है कि इनमें हूबहू बुद्धिस्ट स्टाइल वाला पंचांग प्रणाम करने की परंपरा देखी जाती है।

बौद्ध लोग प्रार्थना की शुरुवात बुद्धमं नमामी...  धमं नमामी ... संघं नमामी कहते हुए पंचांग प्रणाम करते है। नमा+मी ओर नमा+ज दोनों मे नमा शब्द है। बौद्ध पंचशील (पांच शील) का उच्चारण करते हुए हर एक शील के उच्चारण के बाद पंचांग प्रणाम करते है। 
पांच शील है इसलिए पंचांग प्रणाम पाच बार होता है।मुस्लिम पहले बौद्ध हुआ करते थे इसलिए उनकी पांच बार पंचांग प्रणाम करने की आदत आगे चलकर पांच बार नमाज पढने में तब्दील हो गई।
बुद्धिस्ट पंचांग प्रणाम ही आगे चलकर नमाज कहलाया।बुद्धिस्ट पंचांग प्रणाम और नमाज में बहुत हद तक समानता है।
नीचे दिए गए फोटो देखिए समझिए।
इतिहास में हम जितना अधिक पीछे जाएंगे हमारे बिछड़े हुए लोगों को पहचान पाएंगे!अरब के मुस्लिम बौद्ध लोगों के अर्थात भारतीयों के खोए हुए भाई है।

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