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बुद्ध महान क्यों

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बुद्ध महान क्यों ❓ _______________ आज बुद्ध पू्र्णिमा है। बुद्ध पूर्णिमा के ही दिन सिद्धार्थ गोतम (पालि मे गोतम और हिन्दी मे गौतम) का इस धरा पर अवतरण हुआ, आज ही के दिन गोतम तथागत बुद्ध हुए, और आज ही के दिन उनका महापरिनिर्वाण भी हुआ। क्या उन्होंने आज की परिभाषाओं में किसी धर्म, सम्प्रदाय, पंथ, या रिलीजन की स्थापना की ❓ स्पष्ट उत्तर है – नहीं👈  फिर बौद्ध धर्म क्या है❓ पहले यह समझा जाएँ कि धर्म क्या है❓  किसी भी धर्म के संस्थापक उस समय के परिस्थितिओं में उनके समाज में व्याप्त सामाजिक गतिहीनता और सड़न को दूर करने के लिए एक वैचारिक एवं सांस्कृतिक सफल आन्दोलन चलाते हैं। बाद के समय में उनके कुछ बुद्धिमान अनुयायी उनके दर्शन का अपनी समझ से, लेकिन उनके ही नाम पर, अपने कतिपय हितों को प्राथमिकता में रख कर व्याख्या करते है और उस विशिष्ट दर्शन को धर्म का नाम दे देते हैं। कुछ लोग अपनी शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक समझ के अनुसार इसे दर्शन मान कर उसकी अच्छी बातों को ग्रहण करने के साथ मानवता के धर्म को बढ़ाते और मानते है तो कुछ इन्हीं व्याख्याओं को ही धर्म मान कर चलते है। यही बुद्ध के दर...

बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट

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उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बसपा सुप्रीमो बहन कुमारी मायावती जी द्वारा निर्मित 'बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट' (Buddh International Circuit) केवल एक खेल का मैदान नहीं है, बल्कि यह आधुनिक भारत के इतिहास में दूरदर्शिता, साहस और भगवान बुद्ध के प्रति गहरी श्रद्धा का एक जीवंत प्रतीक है। भगवान बुद्ध को समर्पित किया इसके लिए आदरणीय बहन कुमारी मायावती जी का बहुत-बहुत आभार  🙏🙏🙏 नोएडा (ग्रेटर नोएडा) में स्थित यह ट्रैक भारत का इकलौता फॉर्मूला-1 ट्रैक है, जिसने भारत को वैश्विक खेल मानचित्र पर एक नई पहचान दिलाई। आइए, इस ऐतिहासिक परियोजना के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा करते हैं: 1. एक अभूतपूर्व विजन: विश्व स्तरीय सोच भारत में क्रिकेट की लोकप्रियता के बीच, किसी भी अन्य खेल के लिए इतने बड़े स्तर पर सोचना और उसे धरातल पर उतारना एक चुनौतीपूर्ण कार्य था। बहन जी ने यह साबित किया कि भारत केवल पारंपरिक खेलों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह दुनिया की सबसे महंगी और तकनीकी खेल प्रतियोगिता 'फॉर्मूला वन' की मेजबानी करने में भी सक्षम है। इस ट्रैक का निर्माण कर उन्होंने यह संदेश द...

चौधरी चमार

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"चौधरी" एक उपाधी ह जो किसी भी जाती के मुखिया के लिए इस्तेमाल की जाती थी..... ये उनके लिए जो कहते है "चमार चौधरी" कब से हो गए  साल : 1921 एक चौधरी उर्फ़ चमार जाती का मुखिया Book: Hindustan`s Horizon 1921 Author: BT Badley

चंवर वश ( चमार वंश)

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चंवरवंश की वंशावली चंवरवंश एक प्राचीन योद्धा वंश के रूप में जाना जाता है, जिसकी परंपरा राजसत्ता, संघर्ष और स्वाभिमान से जुड़ी रही है। राजा चंवरसेन चंवरवंश के संस्थापक एवं प्रथम शासक। राजा कमलसेन संस्थापक के उत्तराधिकारी, जिन्होंने वंश को संगठित किया। राजा बहलसेन प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने वाले शासक। राजा रतिसेन युद्धकला और सैन्य शक्ति के लिए प्रसिद्ध। राजा भद्रसेन न्यायप्रिय और प्रजावत्सल राजा। राजा श्रीसेन सांस्कृतिक व धार्मिक कार्यों के संरक्षक। राजा सूर्यसेन वंश की सैन्य प्रतिष्ठा को आगे बढ़ाने वाले शासक। राजा चंवरसेन द्वितीय चंवरवंश के पराक्रमी राजा, जिनका संघर्ष दिल्ली सल्तनत से हुआ। राजा चंवरसेन द्वितीय और सिकंदर लोदी का युद्ध इतिहास के अनुसार राजा चंवरसेन द्वितीय और सिकंदर लोदी के बीच कुल तीन युद्ध हुए— प्रथम और द्वितीय युद्ध में राजा चंवरसेन द्वितीय ने सिकंदर लोदी को पराजित किया। तृतीय युद्ध में परिस्थितियों के प्रतिकूल होने के कारण राजा चंवरसेन द्वितीय को पराजय का सामना करना पड़ा। यह संघर्ष चंवरवंश के साहस, स्वाधीनता और युद्धक क्षमता का प्रतीक माना जाता है।

चमार हूँ भूखा नहीं मरूंगा।

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8 मार्च 1988 अमर सिंह चमकीले की गोलीयां मारकर हत्या कर दी गई थी । उनकी पूण्यतिथि पर उन्हें कोटि कोटि नमन !! 80 के दशक के पॉपुलर पंजाबी गायक अमर सिंह 'चमकीला' और उनकी पत्नी अमरजोत की 1988 में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। 8 मार्च, को दोपहर 2 बजे चमकीला और उनकी पत्नी पंजाब के गांव महसामपुर, जालंधर में एक स्टेज शो के लिए पहुंचे थे। जैसे ही वे गाड़ी से उतरे उन पर मोटरसाइकल गिरोह ने अंधाधुंध फायरिंग गोलियां बरसाईं। इसमें चमकीला और उनकी पत्नी (स्टेज पार्टनर) अमरजोत के साथ दो और लोग मारे गए। बता दें, चमकीला और उनकी पत्नी के मर्डर की गुत्थी अब तक नहीं सुलझ पाई है। प्रेग्नेंट थी चमकीला की वाइफ अमरजोत...  - जब अमरजोत की हत्या की गई, उस दौरान वो प्रेग्नेंट थीं। वहीं सिंगर चमकीला, गिल सुरजीत और ढोलक बजाने वाले राजा के सीने पर भी कई गोलियां दागी गई थीं। - महज 10 साल के सिंगिंग करियर में चमकीला निडर होकर समाज की बात कहते थे। यही वजह थी बेहद कम वक्त में उन्होंने पंजाबी म्यूजिक इंडस्ट्री में एक अलग पहचान बनाई थी। - चमकीला अपने गानों में उन चीजों का जिक्र करते थे, जो उन्होंने अपने आ...

बुद्ध ही शिव हैं

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*महाशिवरात्रि❓सत्य पुरात्विक दृष्टि से ✍️ बौद्ध धरोहर और स्थापत्य कला, यह विषय आम जनता के लिए  जटिल है। आज जिसे शिव-शंकर कहते है वास्तविक वह ऐतिहासिक थे ? या बुद्ध को ही अपभ्रंश बनाकर उन्हें शिवशंकर बना दिया❓ शिव-शंकर को हिंदू प्रथम, मध्‍य और अंतिम, सब कुछ मानते हैं।यह लेख लिखने की जिज्ञासा इसलिए प्रकट हुई,  एक बार बाला घाट मध्यप्रदेश गया था। रास्ते से जा रहा था। दुर्गा के पंडाल सजे थे। अचानक शिव मंदिर पर ध्यान गया वहां लिखा था *मृत्युंजय* मन ही मन मे हलचल मची और सोच रहा था कि जिसने अपने जरा-मरण पर विजय पा ली वह *मृत्युंजय* हो गया👈 शंकर को मृत्युंजय महादेव कहा जाता है। अर्थात जिसने मृत्यु पर विजय प्राप्त की वह अरहंत हो जाता है। शिवपुराण में उसे हर-हर महादेव कहा जाता है। वह मूलतः अर्हत्व का ही द्योतक है👈 बौद्ध साहित्य में ऐसी परंपरा है कि 'मार विजय' होने पर ही संबोधि प्राप्त होती है। सिद्धार्थ गौतम ने बोधगया में पीपल के वृक्ष के नीचे वैशाख पूर्णिमा को 'मार विजय' प्राप्त की थी और 'बुद्ध' कहलाए। अर्थात *मृत्युंजय कहलाये👈 इसी प्रकार शंकर को मारकण्डेय ...

जेम्स प्रिंसेप

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अंग्रेज जेम्स प्रिंसेप ने खोज निकाला सम्राट अशोक का 2000 साल पुराना खोया हुआ इतिहास भारत के इतिहास के बारे में अंग्रेजों को काफी दिलचस्पी थी क्योंकि उन्हें काफी चीजें मिला करती थी जिन्हें न तो वे उन्हें पहचान पा रहे थे और न ही भारत के लोगों को उसकी जानकारी ही थी  अफगानिस्तान* से लेकर *कर्नाटक* तक फैले हुए *सम्राट अशोक* के शिलालेखों को  काफी समय तक कोई पढ़ नहीं पाया था, पहली बार इन शिलालेखों  को पढ़ने में एक अंग्रेज *जेम्स प्रिंसेप* ने सफलता पाई  जेम्स प्रिंसेप अपने पिता के साथ भारत आए थे उन्हें टकसाल में काम मिला था, टकसाल के काम के साथ-साथ उन्हें भारत के इतिहास को जानने की जिज्ञासा थी,  1820 में जेम्स प्रिंसेप का स्थानांतरण बनारस हो गया, यहां पर उन्हें भारत के इतिहास को जानने की समझने का काफी मौका मिला, प्रिंसेप टकसाल में सिक्कों की डिजाइन करने का काम करते थे, उन्हें भारत के बहुत सारे पुराने सिक्के मिलेे  जिनमें कुछ लिखा होता था, किंतु आज तक कोई पढ़ नहीं पाया था ,इन सिक्कों में लिखी इबारत को पढ़ने का सबसे पहले *जेम्स प्रिंसेप* ने प्रयास किया, इ...