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मोदी जी फर्जी सर्टिविकेट

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नरेंद्र मोदी के इस सर्टिफिकेट को एक बार अच्छे से देख लो इनका जन्म 17 सितंबर 1950 का है और एडमिशन किये है 1981 मे English मीडियम मे M.A. फर्स्ट आये है | मतलब गुरूजी उस वक्त 31 साल मे MA के लिए एॕडमिशन किये थे और तब 31 साल मे ही बुढे हो गये थे और आज भी जैसे सर्टिफिकेट मे लगाये हूए फोटो मे जैसे दिख रहे है वैसे ही आज भी है| अब आप ही अंदाजा लगा सकते है कि यह सर्टिफिकेट नकली है या असली ! और एक बात 1983 मे जो भी ग्रेजुएट हुए है बता सकते है कि क्या सर्टिफिकेट पर फोटो लगती थी या नही?

आरक्षण

मैं भी आरक्षण की विरोधी हूँ सभी क्षेत्रों से इस गंदगी को सफाई की जरुरत है == 1. EWS( सुदामा कोटा ) 10% जितना आवादी उतना आरक्षण  2. मंदिर आरक्षण =100% पीढ़ी दर पीढ़ी, सदियों की प्रथा  3. न्यायलय आरक्षण = कॉलेजिएम सिस्टम, कोर्ट में जज, वकील में 99% वंशवादी प्रक्रिया, 4. शिक्षा आरक्षण =95%,विश्वविद्यालय में कुलपति, सचिव, प्रिंसपल, प्रोफेसर, विद्यालय में हेडमास्टर जैसे आरछित पद,प्राइवेट शिक्षण संस्थान, वंशावली प्रकिया  5. स्वास्थ्य आरक्षण = 90%, सरकारी या प्राइवेट डॉक्टर वंशवादी प्रकिया  6. मिडिया आरक्षण = 100%,  7. प्रशासनिक आरक्षण = 90% IAS, IPS, IFS आदि  8.विधायिका आरक्षण = 70-80% मुख्यमंत्री,राजयपाल, मंत्री, MP, MLA, MLC, सचिव जैसे अन्य पदों पे वंशवादी प्रकिया वोट 10% है तो 80% कैसे सेलेक्ट होता है? 9. बूरोक्रेसी आरक्षण =95% वंशावली कोटा  10. ठेकेदारी आरक्षण = 95%  11. खेल आरक्षण क्रिकेट = 92% 12. सिनेमा आरक्षण = 96% 13. संकराचार्य आरक्षण = 100%, मैरिट, ज्ञान जातिवादी प्रक्रिया. 14.RSS चीफ आरक्षण = 100% योग्य, काविल, अनुभव से क्यों नहीं? 15. वेलफेयर...

चमार पर्वत

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चमार शब्द और सभ्यता का प्राचीन इतिहास: एक विश्लेषण आमतौर पर यह झूठी और मनगढ़ंत कहानी प्रचारित की जाती है कि 'चमार' शब्द 15वीं सदी में सिकंदर लोदी द्वारा महान गुरु रविदास जी को दिया गया था, जो कि पूरी तरह से असत्य है। जब हम पूरे मानव इतिहास को गहराई से खंगालते हैं, तो वास्तविक हकीकत सामने आती है। सच तो यह है कि चमार शब्द अति प्राचीन है और मूल रूप से इसका चर्मकारी (चमड़े के शिल्प) से कोई लेना-देना नहीं है। चमार घाटी सभ्यता और भौगोलिक उत्पत्ति चमार पर्वत शृंखला: दुनिया का सबसे प्राचीन मानव कबीला चमार कबीला है, जो हिमालय की 'चमार पर्वत शृंखला' में निवास करता था। हिमालय के इस क्षेत्र में रहने के कारण अत्यधिक श्वेत (साफ) रंग होने की वजह से इनके लिए 'चामरा' शब्द का प्रयोग होने लगा और यही इस कबीले का नाम बन गया। सिंधु घाटी सभ्यता का मूल: इसी क्षेत्र से 'चमार घाटी सभ्यता' की शुरुआत हुई, जिसे बाद के इतिहास में 'सिंधु घाटी सभ्यता' के नाम से जाना गया। प्राचीन काल में पूरा एशिया 'चमार द्वीप' कहलाता था। आदि पुरुष: इस सभ्यता के आदि पुरुष भगव...

बुद्ध महान क्यों

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बुद्ध महान क्यों ❓ _______________ आज बुद्ध पू्र्णिमा है। बुद्ध पूर्णिमा के ही दिन सिद्धार्थ गोतम (पालि मे गोतम और हिन्दी मे गौतम) का इस धरा पर अवतरण हुआ, आज ही के दिन गोतम तथागत बुद्ध हुए, और आज ही के दिन उनका महापरिनिर्वाण भी हुआ। क्या उन्होंने आज की परिभाषाओं में किसी धर्म, सम्प्रदाय, पंथ, या रिलीजन की स्थापना की ❓ स्पष्ट उत्तर है – नहीं👈  फिर बौद्ध धर्म क्या है❓ पहले यह समझा जाएँ कि धर्म क्या है❓  किसी भी धर्म के संस्थापक उस समय के परिस्थितिओं में उनके समाज में व्याप्त सामाजिक गतिहीनता और सड़न को दूर करने के लिए एक वैचारिक एवं सांस्कृतिक सफल आन्दोलन चलाते हैं। बाद के समय में उनके कुछ बुद्धिमान अनुयायी उनके दर्शन का अपनी समझ से, लेकिन उनके ही नाम पर, अपने कतिपय हितों को प्राथमिकता में रख कर व्याख्या करते है और उस विशिष्ट दर्शन को धर्म का नाम दे देते हैं। कुछ लोग अपनी शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक समझ के अनुसार इसे दर्शन मान कर उसकी अच्छी बातों को ग्रहण करने के साथ मानवता के धर्म को बढ़ाते और मानते है तो कुछ इन्हीं व्याख्याओं को ही धर्म मान कर चलते है। यही बुद्ध के दर...

बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट

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उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बसपा सुप्रीमो बहन कुमारी मायावती जी द्वारा निर्मित 'बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट' (Buddh International Circuit) केवल एक खेल का मैदान नहीं है, बल्कि यह आधुनिक भारत के इतिहास में दूरदर्शिता, साहस और भगवान बुद्ध के प्रति गहरी श्रद्धा का एक जीवंत प्रतीक है। भगवान बुद्ध को समर्पित किया इसके लिए आदरणीय बहन कुमारी मायावती जी का बहुत-बहुत आभार  🙏🙏🙏 नोएडा (ग्रेटर नोएडा) में स्थित यह ट्रैक भारत का इकलौता फॉर्मूला-1 ट्रैक है, जिसने भारत को वैश्विक खेल मानचित्र पर एक नई पहचान दिलाई। आइए, इस ऐतिहासिक परियोजना के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा करते हैं: 1. एक अभूतपूर्व विजन: विश्व स्तरीय सोच भारत में क्रिकेट की लोकप्रियता के बीच, किसी भी अन्य खेल के लिए इतने बड़े स्तर पर सोचना और उसे धरातल पर उतारना एक चुनौतीपूर्ण कार्य था। बहन जी ने यह साबित किया कि भारत केवल पारंपरिक खेलों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह दुनिया की सबसे महंगी और तकनीकी खेल प्रतियोगिता 'फॉर्मूला वन' की मेजबानी करने में भी सक्षम है। इस ट्रैक का निर्माण कर उन्होंने यह संदेश द...

चौधरी चमार

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"चौधरी" एक उपाधी ह जो किसी भी जाती के मुखिया के लिए इस्तेमाल की जाती थी..... ये उनके लिए जो कहते है "चमार चौधरी" कब से हो गए  साल : 1921 एक चौधरी उर्फ़ चमार जाती का मुखिया Book: Hindustan`s Horizon 1921 Author: BT Badley

चंवर वश ( चमार वंश)

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चंवरवंश की वंशावली चंवरवंश एक प्राचीन योद्धा वंश के रूप में जाना जाता है, जिसकी परंपरा राजसत्ता, संघर्ष और स्वाभिमान से जुड़ी रही है। राजा चंवरसेन चंवरवंश के संस्थापक एवं प्रथम शासक। राजा कमलसेन संस्थापक के उत्तराधिकारी, जिन्होंने वंश को संगठित किया। राजा बहलसेन प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने वाले शासक। राजा रतिसेन युद्धकला और सैन्य शक्ति के लिए प्रसिद्ध। राजा भद्रसेन न्यायप्रिय और प्रजावत्सल राजा। राजा श्रीसेन सांस्कृतिक व धार्मिक कार्यों के संरक्षक। राजा सूर्यसेन वंश की सैन्य प्रतिष्ठा को आगे बढ़ाने वाले शासक। राजा चंवरसेन द्वितीय चंवरवंश के पराक्रमी राजा, जिनका संघर्ष दिल्ली सल्तनत से हुआ। राजा चंवरसेन द्वितीय और सिकंदर लोदी का युद्ध इतिहास के अनुसार राजा चंवरसेन द्वितीय और सिकंदर लोदी के बीच कुल तीन युद्ध हुए— प्रथम और द्वितीय युद्ध में राजा चंवरसेन द्वितीय ने सिकंदर लोदी को पराजित किया। तृतीय युद्ध में परिस्थितियों के प्रतिकूल होने के कारण राजा चंवरसेन द्वितीय को पराजय का सामना करना पड़ा। यह संघर्ष चंवरवंश के साहस, स्वाधीनता और युद्धक क्षमता का प्रतीक माना जाता है।